उत्तर प्रदेश की जनता एक नये चुनाव से रूबरू होने के लिये कमर कसे मैदान मै ह| 28 सितम्बर को पहले चरन के मतदान हेतु नामाकन दाखिल किये गये| इसमे दिलचस्प यह ह कि उत्तर प्रदेश मे चुनाव को पर्वो की तरह अहमियत मीलती ह|हर घर ओर हर आदमी जब तक अपनी व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर चुनाव मे श,रीक न हो तब तक उन्हे चुनाव मानने का कोइ ओचित्य नही1लेकिन दुर्भाग्य से उनके ओचित्य को कई ओर महत्वपूर्न चीजे ह जो परिभाशित करती ह|वेही चीजे जिनका पूरे भारत मे कही भी चुनाव के दोरान प्रयोग प्रत्यक्श होता आप देख सकते ह लेकिन यहा.... उत्तर प्रदेश के सीमावर्तित राज्यो जेसे हरियाना ओर दिल्ली जहा कि शराब की कीमतो मे भारी अन्तर है उत्तर प्रदेश वहा की शराब के लिये एक उपभोक्ता की तरह है मगर चुनाव मै ओर ज्यादा ओर अवैध तरीके से|प्रशासन के लाखो दावो के बाव्जूद भारी मात्रा मे शराब इन सीमा पर स्थित राज्यो से उत्तर प्रदेश मे अपनी दस्तक दे चुकि होगी मगर चिन्ताजनक पहलु इस शराब के नाम पर नकली शराब का कारोबार करने वालो को लेकर है|जिसे पीकर गरीब लोग अपनी जान का जोखिम पैदा करते है|शराब के साथ ही रूपयो का खुलेआम वितरन सोचने को विवश करता ह|ओर यह देखकर हैरत होती है कि सब कुछ हो प्रसाशन की एन नाक के नीचे रहा है|जैसे जैसे लोग जागरूक हो रहे है चुनावो को लेकर उनमे एक उत्तेजना सी पैदा होती जा रही है|येही कारक है जो उत्तर प्रदेश मे उन हालातो को जन्म देते है जिनमे हत्या तक हो जाना आम बात है|आखिर इस सबके बावजूद क्या लोकतन्त्र के कोइ मायने रह जाते है|
No comments:
Post a Comment