Thursday, November 3, 2011

आतंकवाद तथा नक्सलवाद जैसे कट्टरपन्थी नाम सही मायनौ मे देश और दुनिया के लिये दुखद स्वप्न की तरह होते है सब समाज के लिये एक बिमारी की तरह है लेकिन बिना उनके मूल को जाने समझे हमे विचार नही रख देना चाहिय।जहाँ तक आतँकवाद की बात है उसमे जिद तथा नकारत्मता कुट कूट कर भरी है लेकिन नकस्लवाद के पीछे कही न कही एक मिशन कि बू आती है उसे खडा करने मे सरकार की भुमिका से इन्कार नही किया जा सकता।हत्याओ तथा समाज मे दहशत फैलाने के दोनो के दोश समान है लेकिन विचारधारा मे बहुत अन्तर है इसलिये समानता का प्रश्न जरा कठिन हो जाता हैं।