Sunday, October 4, 2015

सस्ती मोत

देश मे शराब का चलन दिनो दिन विस्तार लेता जा रहा है|छोटे शहरो ओर गावो मे शराब के सेवन को लगातार स्तर के साथ जोड्कर देखाजाने लगा हे|ओर आमतोर पर सभ्य समाज मे बुरी चीज मानी जाने वाली शराब को अब उतना बुरा नही माना जाता|आज से एक दशक पुर्व तक किसी खास आय ओर आयु वर्ग के लोगो के शोक का दर्जा रखने वाली शराब के इस्तेमाल मे लोगो द्वारा अब कोइ नियम कायदा इस्तेमाल नही किया जाता|छोटे शहरो की हालत तो फिर भी कुछ सही कही जा सकती है लेकिन अगर बात गाव की आती है तो तस्वीर ओर भी भयावह हो जाती है| आमतोर पर दो जून की रोटी का का बमुस्किल जुगाड कर अपने परिवार की गुजर करने वाले लोगो मे शराब के सेवन मे एजाफ़ा गम्भिर घट्ना है|साथ ही नोजवानो ओर बच्चो के बीच मोत के जाम को शेयर करने की आदत एक बारगी सोचने को मजबूर जरुर करती है|अगर मै मात्र अपने गाव की ही बात करू तो पिछ्ले एक दशक के दोरान शराब के सेवन के चलते सैकडो लोग काल के गाल मे समा गये |इन अकाल मोतो मे हर आयु वर्ग के लोग थे लेकिन अगर बारीकि से पड्ताल की जाय तो नोजवानो की ही तादात जयादा मिलेगी| अब सवाल आता है कि इस शराब के विस्तार लेते चलन के पीछे काम करने वाले कारक कोन से है|हालाकि उत्तर प्रदेश मे बिक रही शराब की कीमत इतनी ज्यादा है कि आम आदमी की आमदनी उसे पीने की इजाजत नही देती बावजूद इसके आज आपको गाव मे हर तीसरा आदमी शराब का आदी मिलेगा| इसका जवाब है गाव मे चल रहे शराब के अवैध कारोबार जिनकी न कोइ सीमा है ओर न किसी बात का डर क्योकि ये अवैध धन्धे सीधे पुलिस की सरपरस्ति मे चलते है|ओर शराब के आदि हर आदमी की पहुच इस सस्ती ओर शुलभ शराब तक हर समय रहती है|पहले जहा ये  धन्धा पर्दे के पीछे बहुत देखभालकर किया जाता था वही अब धीरे-धीरे इसे मानो सामाजिक मान्यता प्राप्त हो गई है|फ़िर क्या बडे ओर क्या बच्चे हर किसी के लिये सस्ता नशा सुलभ हो गया है|
लेकिन बात बस यही खत्म नही हो जाती पास के राज्यो हरियाणा ओर दिल्ली से भी बडी मात्रा मे हर रोज शराब उत्तर प्रदेश की सीमा मे दाखिल होकर इन गावो मे पहुचती है|सरकार भले ही सीमाओ से चल रहे इस कारोबार की बात से इनकार करे लेकिन सीमाओ पर तैंनात पुलिस के जवानो की मिली भगत से यह धन्धा भी खूब फ़ल फ़ूल रहा है|शराब के अवैध कारोबार के दोनो तरीको से लोगो की जान का जोखिम तो है ही क्योकि अधिक लाभ के चक्कर मे इस शराब की गुणवत्ता पर ध्यान अमुमन नही दिया जाता साथ ही सरकार को राजस्व का भारी नुकसान भी होता है|लेकिन गाहे बगाहे लोगो द्वारा इस अवैध धन्धे के खिलाफ़ बुलन्द की जाने वाली आवाज को भी दबा दिया जाता है|शराब को मिल रही इस सामाजिक मान्यता का ही परिणाम है कि अधिकतर बेरोजगार युवा इस धन्धे मे रुचि दिखा रहे है जोकि ओर भी घातक है|अगर समय रहते प्रशासन इस ओर ध्यान नही देता तो परिणाम घातक हो सकते है| 

Saturday, October 3, 2015

मेरी पहली यात्रा

आज के भागमभाग भरे जीवन मे राहुल सान्क्रत्यायन प्रासगिक हो जाते है| घूमना जहा सेहत के लिये लभदायक व्यायाम है वही अपने देश ओर समाज को जानने का समझने का जरिया भी| वरना घर रहते वास्कोदिगामा कैसे जान पाते कि उनके देश के आगे भी कही दुनिया है|अगर कहा जाये कि राहुल सान्क्रत्यायन हमारे वास्कोदिगामा थे तो अतिश्योक्ति न होगी|लेकिन इतने भर से गर्व करने का कोइ आधार नही बनता|हमारे देश मे तमाम लोग है जिनका जीवन अपने घर ओर कार्यस्थ्ल तक सीमित है|मै भी उन्ही बहुसन्ख्यक लोगो की जमात का हिस्सा था| अपनी यात्रा से पहले|                                                                                       शाम हो रही थी लेकिन मै बाकि लोगो के साथ वार्ता मे शामिल होने को कतई तैयार न था क्योकि अगले दिन किसी काम से मुझे लखनऊ जाना था|यह मेरी पह्ली इतनी लम्बी यात्रा थी जिसमे मुझे पता लगता कि भारत की किताबो से इतर हकिकत मे आखिर क्या भोगोलिक स्थिति थी?दिल तो बागबाग था ही इसलिये काम को करने मे उस दिन अतिरिक्त आनन्द आ रहा था|अगले दिन रेल मे घुसते हुए मै अपने आपको दुनिया का सबसे खुशनसीब आदमी मह्शूस कर रहा था|मेरे पास यह सोचने का बिल्कुल भी वक्त नही था कि उस यात्रा को कर्ने वाला मै अकेला सख्श नही हू|खचाखच जमा लोगो के बीच मै अकेला आदमी था जिसे रेल के देर या जल्दी आने से कोइ खास मतलब नही था|आखिर जब गाडी पहूची तो उसके चलने के तरीके ने ही मुझे उतना रोमान्चित कर दिया जितना कि मै पहले कभी नही हुआ था| कुछ देर रुककर गाडी ने रफ्तार पकड ली|आसपास की चीजे उतनी रफ्तार से पीछे भाग रही थी|लेकिन मेरी उमन्गो की रफ्तार का कोइ पारावार न था|2-4 घटे बीते होगे की सूर्य नारायण पस्चिम मे कही गायब हो गये ओर मेरे लिये बाहर की मोहक छटा देखना असम्भव हो गया|

चेतना

त्तर प्रदेश की जनता एक नये चुनाव से रूबरू होने के लिये कमर कसे मैदान मै ह| 28 सितम्बर को पहले चरन के मतदान हेतु नामाकन दाखिल किये गये| इसमे दिलचस्प यह ह कि उत्तर प्रदेश मे चुनाव को पर्वो की तरह अहमियत मीलती ह|हर घर ओर हर आदमी जब तक अपनी व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर चुनाव मे श,रीक न हो तब तक उन्हे चुनाव मानने का कोइ ओचित्य नही1लेकिन दुर्भाग्य से उनके ओचित्य को कई ओर महत्वपूर्न चीजे ह जो परिभाशित करती ह|वेही चीजे जिनका पूरे भारत मे कही भी चुनाव के दोरान प्रयोग प्रत्यक्श होता आप देख सकते ह लेकिन यहा....                                                                                                                    उत्तर प्रदेश के सीमावर्तित राज्यो जेसे हरियाना ओर दिल्ली जहा कि शराब की कीमतो मे भारी अन्तर है उत्तर प्रदेश वहा की शराब के लिये एक उपभोक्ता की तरह है मगर चुनाव मै ओर ज्यादा ओर अवैध तरीके से|प्रशासन के लाखो दावो के बाव्जूद भारी मात्रा मे शराब इन सीमा पर स्थित राज्यो से उत्तर प्रदेश मे अपनी दस्तक दे चुकि होगी मगर चिन्ताजनक पहलु इस शराब के नाम पर नकली शराब का कारोबार करने वालो को लेकर है|जिसे पीकर गरीब लोग अपनी जान का जोखिम पैदा करते है|शराब के साथ ही रूपयो का खुलेआम वितरन सोचने को विवश करता ह|ओर यह देखकर हैरत होती है कि सब कुछ हो प्रसाशन की एन नाक के नीचे रहा है|जैसे जैसे लोग जागरूक हो रहे है चुनावो को लेकर उनमे एक उत्तेजना सी पैदा होती जा रही है|येही कारक है जो उत्तर प्रदेश मे उन हालातो को जन्म देते है जिनमे हत्या तक हो जाना आम बात है|आखिर इस सबके बावजूद क्या लोकतन्त्र के कोइ मायने रह जाते है|

Thursday, November 3, 2011

आतंकवाद तथा नक्सलवाद जैसे कट्टरपन्थी नाम सही मायनौ मे देश और दुनिया के लिये दुखद स्वप्न की तरह होते है सब समाज के लिये एक बिमारी की तरह है लेकिन बिना उनके मूल को जाने समझे हमे विचार नही रख देना चाहिय।जहाँ तक आतँकवाद की बात है उसमे जिद तथा नकारत्मता कुट कूट कर भरी है लेकिन नकस्लवाद के पीछे कही न कही एक मिशन कि बू आती है उसे खडा करने मे सरकार की भुमिका से इन्कार नही किया जा सकता।हत्याओ तथा समाज मे दहशत फैलाने के दोनो के दोश समान है लेकिन विचारधारा मे बहुत अन्तर है इसलिये समानता का प्रश्न जरा कठिन हो जाता हैं।